सोमवार, जनवरी 17

अहाँ के शहरि मे

रहै छी सहमि-सहमि, अहाँ कें शहरि मे।
चलै छी सम्हरि-सम्हरि, अहाँ कें शहरि मे।।

लूटपाट आ छीना-झपटी, सौंदर्य अहि नगर कें।
रोज शीलभंग होइए कतेको, अहाँ कें शहरि मे।।

चोर मस्त कोतवाल पस्त, शासन पूरा भ्रष्टï यौ।
जंगल के कानून चलैए, अहाँ कें शहरि मे।।

जे प्रवासी रूप निखारल, ओकरे पर ईल्जाम यौ।
ईनाम मे हाथ कटैए, अहाँ कें शहरि मे।।

किसान के खेत बिकाओल, कंक्रीटक अछि जाल बिछाओल।
यमुना के धार हराओल, अहाँ कें शहरि मे।।

सड़क बनल समर भूमि, शोणित सँ हलकान यौ
ब्लूलाइन सँ सब डेरायल , अहाँ कें शहरि मे।।

1 टिप्पणी:

आशीष अनचिन्हार ने कहा…

NAMSKAR, MATLAK BAADK SHER MAIN KAFIYA GALAT ACHI.GHAZAL KE TITILE NAHI HOIT CHAIK. MAITHILI GHAZALK LEL AAU http://anchinharakharkolkata.blogspot.com.