शुक्रवार, जनवरी 23

जीवन यात्रा

जीवन यात्रा अनंत ,अपरिमित , असीमित ,जीवन अवधि लघु ...लघुत्तर । आयाम वृहत ,परिणाम सिमित . कलजेयी चुनौती समय साक्षेप साधन । तथापि भागी अछि मन पता नहि कत। अभिमन्यु के चक्र भेदन वा अर्जुन के माछक आंखी, कोनो क्षमता टी नहि अछि हमरा।

2 टिप्‍पणियां:

kapil ने कहा…

wah maja aabi gail... Sriman ehan gudh drishti rakhnihar ke pranam....

Babul Jha ने कहा…

tohar mo`n, mijaj soch, sankalp aa sankalpana akhanahu otahi chauk jataya hum dekhane chalahun. It is so difficult to maintain this degree of consistency man!!!!

Thanks for everthing you are doing.