शुक्रवार, जुलाई 31

बिहारी बाजे तो - बोका, बकलेल, बुद्धि-हारी

मटरू कामति जखन रंग में आबि जाथि तखन के करा की कहता से की ओ अपनहुँ जानैत छथि? स्पश्टवकता कें बकटेंट कहल जाइत छेक आ से त छथिए मटरू कामति। ओहि दिन हाट पर स फिरल अबैत रही त दुर्गा स्ािान लग देखैत छी जे बड़का मजलिस लागल अछि आ मटरू कामति मुख वक्ता जकाँ उच्च स्वर मे अपन वक्तृत्व कला सँ सबकें सम्मोहित करने छथि। आवाज स तऽ दूरे सँ चीन्ह गेल रहियन्हि। संखद अनुभूति ( जे मटरू कामति के देखिते हमरा अछि) स हमहूँ ओहि मजलिस मे षामिल भऽ गेलहुँ। मटरू कामति के पीठ छलैन्ह हमरा दिषि आ ओ धारा प्रवाह द रहल छलाह अहाँ सब झूठे का घमरथन कर रहे है तखन से। अरे की कऽ लेगा नीतीष कुमार? की खत्म भऽ गिया है बिहार मे लूट, अपहरण, बलात्कार आ कि हत्या? ओकर अपने पार्टी का नेता लोकनि तऽ सब से बेसी बाँहि फड़काता रहता है। ओकरा पर त कोनो लगामे नही है दोसरे के मुँह में जाबि लगाने चला हैं। एक गोटा प्रतिवादकयलथिन्ह तऽ की कानून-व्यवस्था नहि सुधारल छेक? अपराधक ग्राफ नींचा नहि भेल अछि आ चारूकात जे फस्ट किलास रोड बनि रहल अछि से विकास कार्य नहि छैक त की छेक? चीन्नी मिल फेरो स षुरू भऽ रहल अछि ओ सब की अहाँ के नही देखइत अछि? मटरू कामति भड़कि गेलाह चारूकातक बनैत रोड त अहीं के दिखाई देता होगा, हमरा तऽ एखनो ग्रामीण क्षेत्र मे ओहने रोड दिखाई देता है। अहीं के गाम आने मे की कम दिक्कत है। कतेक सुधरि गिया है रोड? आ जे चमचमाता रोड का बिकास काज आपको दिखाई देता है से पूरा देष मे भऽ रहा है। ओ तऽ बाजपेयी सरकार का सड़क जोड़ो कार्यक्रम का हिस्सा है। नीतीष कुमा का तो बहादुरी होता कि ओ महानगर आ देष जोड़ो के तर्ज पर कम से कम प्रत्येक ग्राम के जिला मुख्यालय से पक्की रोड से जोड़ने का कार्यक्रम चलाते। नेषनल हाई वे से इधर सुदुर ग्रामीण क्षेत्र मे तो रोड सब का एखनियों कोई माय-बाप नहि है। अहाँ अपने ग्राम का हाल देखिमे न, दोसर ठाम का तो बाते छोड़िये दिजीए। हम त ग्राम घुसैत छी, हमारा तऽ भरि मिथिलांचल कऽ ग्रामीण सड़क आ परिवहन का हाल बुझा है तखन ई जरूर है कि नेषनल हाईवे से कतेको जगह का हाल सुधरि रहा है ओ षाबाषी पा रहे हैं नीतीष भैया। फेर जेना किछु यादि अएलन्हि। बात कड़ी जेड़ित बजलाह अहाँ जे चीनी मिलक बात करै छी त ओकरा कीदन तऽ कहते है, हँ, कन्हा कुकुर माड़े तिरपीत, तकर पैर हैं कैगो नोएडा-गुड़गाँव सनक षहर बसाया जा रहा है बिहार मे। की बाहर का लोक सब नौकरी। रोजगार के लिए बिहार आना षुरू कर दिया है। बाहरी का तो छोड़िये कि बिहारिए का पलायन बन्द भऽ गिया है। कतेक उच्चस्तरीय षिक्षण-संस्थान खुला आकि विकसीत हुआ है जहाँ बाहर से लोक पढ़ आते अरे कमाइ आयेगा कियो, अपने बच्चा सब पढ़ने को वास्ते बाहर जा रहा है। सर्दी-खाँसी-जुखाम वक का ईलाज कराने लोग एखनियों बाहरे पड़ाता है। ईलाज तक इतजाम नहि है और बिहार के विकास की बात करते है। पढ़ने-सुनने मे तो बहुत नीक लगै छै इै सब मुदा जमीनो पर मे असरि दिखना चाहिए।
हम देखल जे मटरू कामति भाई नीतीष कुमार पर आमलि पीने छथि। हुनका लालू यादव आ नीतीषक षासन मे अन्तर नहि देखा रहल छनि। तैं पाछु स वोकरा देलयनि औ मटरू कामति ज, आई नीतिष कुमार पर एतेक प्रसन्न कियैक छियेक? हमर आवाज सुनि ओ मुड़ि क पाछा तकलाह आ कहलाह अरे सरकार अहाँ? अहीं सें भेंट करवा लेल आएल रही। गाम पर पता चलल जे अहाँ हाट पर गेल छी त ओम्हरे जाठत रही कि ई सब घेरि कऽ ....। खैर छोड़ू, चलू आब हमहूँ भाभट समटी। ई कहैत अपना बात के ओतहि छोड़ैत ओ हमरा संग बिदा भऽ गेलाह। रस्ता मे हाल-चालक उपरान्त पूछलयन्हि जे नीतीष सरकार सँ एतेक खिन्न कोन कारण छी त ओ ममा ‘क’ हँसि देलाह कहलाह - तमसायल कियेक रहबै, सरकार? लालू आ नीतीष सरकार के अन्तर तऽ सर्वत्र देखर छेक, आ तखन पटरी सँ उतरल व्यवस्था के दुरूस्त करबाक थोड़ेक समय तऽ लगबे करतैक? तखन करितियैक की कोनो मैथिल के चाह-पानि आ मधुर लेल पूछबैक नहि आ खालीए पेट ओकरासऽ भरि दुनियाक फूसियाही गप्प करबैक तऽ ओ एहने गप्प ने करत? फेर जेना उपराग दैत कहलाह अहूँ गामक संस्कार बहुत बदलि गेल अछि सरकार। लोक तऽ जेना अतिथ्य सत्कारे बिसरि गेल अछि। मटरू कामतिक गप्पक पहिल हिस्सा सुनि जे हँसी लागल स1 ताहि पर हुनक आक्षेप विराम लगा देलक कहलयन्हि एहन कोनो बात नही छैक मटरू कामति चैक चैराहाक अप्पन संस्कार आ सीमा होइत छेक राति मे अहाँ एहिठाम विश्राम करू, हमरा लोकनि एखनो अतिथि देव भवः संस्कारक अनुगामी छी। मटरू कामिति ठहाका लगबैत कँहलाह नीमीष सरकार हो वा कोनो सरकार, की ग्रामीण क्षेत्र मे परिवहन क एहन कोनो व्यवस्था का सकल अछि जे कोनो ग्रामीण के कोनो भइजीयों काजे दुपहर के बाद ग्राम पड़ैक तऽ ओकरा कोनो सवारी गाड़ी भेटि सकै? राति मे तऽ हम रूकवे करब, मुदा हाटो पर अहाँ माछ कहाँ किन्लहुँ अछि? आतिथ्य सत्कार मिथिला ते बिनु माछक होई तऽ एकरा बदलल संस्कारे में कहबैक। फेर एक आक्षेप आ उपराग?
चाहक चुस्की जेना मटरू कामति क क्लात्र चेहरा आ षिथिल मूड पर सजीवनीक असरि षुरू का देने छल। हम पूछलयन्हि एक बात कहू मटरू कामति, बिहारक प्रतिमाह लोहा तऽ तकरीबन पूरा देष मानैत अछि तथापि बिहारीक छति एतेक खराब किएक बनल अछि भकर देष मे? बिहारी षब्दक व्यवहार बहुत बेजा अर्थ आ संदर्भ मे होइत अछि, हम पूछलयन्हि एक बात कहू मटरू कामति, बिहारक प्रतिमाह लोहा तऽ तकरीबन पूरा देष मानैत अछि तथापि बिहारीक छति एतेक खराब किएक बनल अछि भकर देष मे? बिहारी षब्दक व्यवहार बहुत बेजा अर्थ आ संदर्भ मे होइत अछि, तकर कारण की। चाहक अंतिम चुस्की लैत मटरू कामति बजलाह-तकर कारण बिहारी और की। से कोना? कनि फरिच्छा के कहू ने। हम आग्रह कयलन्हि। बात तऽ षीषा जकाँ साफ अछि, मटरू कामति बजलाह, बिहारक षाब्दिक अर्थ पर कहियो ध्यान देलियैक अछि-बसँ बक्टेंट, ह सँ हरमादी आ र स रगरियल। तैं बिहारी कें एहि गुण सँ परिपूर्णे देखबै आ मैह कारण दैक जे बिहारी आई गारि आ अपमान सूचक षब्द बनि गेल अछि। एके सांस में कहि गेलाह मटरू कामति। बक्टेंट, हरमादी आ रगरियल बिहारि क तऽ एगो सर्वथा नवीने अर्थ निकालन्हि अछि मटरू कामति। अद्भूत बिहारी क आ खासकऽ मैथिल मानसिकता के देखैत विलक्षण विषेश्ण तथापि विरोध करैत कहलयन्हि आँय यौ, मटरू कामति, जाहि बिहारक यषोगाण स तमाम ऐतिहासिक आ धार्मिक ग्रंथ भरल अछि। जाहि भूमि पर अनेको धर्मगुरू, दार्षनिक, वैज्ञानिक आगात्मिक राजनीतिक ना एक स बढ़ि एक उद्मत विद्वान भेलाह, जाहि भूमिक उर्वसा आ मानसिक विलक्षणताक लोहा एखनों पूरा देष मानि रहल अछि, तकरा बादे अहा1क ई विचार अछि? कोनो भी प्रतियोगी परीक्षा में सबस नीक परिणाम बिहारीक प्रतिभा दैत अछि, कोनो भी सरकरि आ गैर-सरकारी संस्था मे बिहारी उच्च पद आसीन अछिए तकर बादो अहाँक ई उपमा आ अलकरण हमरा नीक नही लागल। मटरू कामति खैनी चूनबैत चूनबैत अचानक तैष मे आबि गेलाह-उचित बात ककरा नीक लगता है जे अहाँक लगेगा। अहाँ केा तो नीक लागेगा जखन कियो कहेगा कि बिहारी सबको गर्दनियाँ देकर भगाओ हियाँ से आ कि जब कियो कहेगा कि बिहारियों के आने से हमर षहर गन्द भऽ गिया है, कोनो नी बिहारी अपन मुँह उठाके सीधे हमरे केा गन्दा करने आबि जाता है, ओकरा सब पर लगाम लगाना होगा। अरे बिहारी मे कोनो आनि-अपग्रानि थोड़े होता हौ? दोसरक सामने सिटिर-पिटिर करेगा आ अपनामे कतनो कंुकुर-कटाऊझ स फुर्सते नही रहेगा। सबटा पुरूश्, वीरता, स्वाभिमान, पौंतराबाजी, राजनीति-कूटनीति, छल प्रपच अपने मे करता रहेगा। दोसरक चाकरी, खुषामद आ तलवा सहलाने मे माहिर इस बिरादरी का कभी अपनों के तसकी पर पंसन्न होते देखे है? अरे ओतऽ टांगे खीचने का जुति भिड़ाता रहता है खाली। आत्म विमुग्धता आ पर निंदा सस पलखति कखन होता है? चैक चैराहा पर दोसरक पाई के चाह-पान पर देष-दुनिया के सब विश्य कचराही छाँटता फिरेगा किन्तु कखनो..... खैर छोड़ियेख् कोन बेकार का विश्य उठ कर बैस गिये, माथा टनकऽ लागा। ई कहैत मटरू कामति खैनी मुँह मे लऽ लेलाह।
हम देखल जे एखन मटरू कामति तरंग मे छथि। जे बजता कटूवितए। ओना ओ अनुचित वऽ किछु बाजि नही रहल छलाह। सच्च बात त ठीके कटकटा क लगैत दैक लोक के। तथापि हुनक मूड षांत करवाक गरज स प्रस्ताव राखलयन्हि एखन भोजन मे तऽ किछु विलम्ब होइत, कियैक ने एक बेर फेर एक एक कप चाह........ मटरू कामति बीच्चे मे बजलाह ताहि मे पूछबाक कोन प्रयोजन। मटरू कामति संग लोकक मँुह सँ आई जाही तरहक गप्प सुनबा मे भेटल ओ अप्रव्याषित छल। जाहि विश्य पर गप्प करऽ चाहैत छलों से हुनक भावावेष देखि फेर षुरू हिम्मत होइत छल। तईयों चाहक संग एम्हर ओम्हर के कतेको बात करैत हम मटरू कामति कें फेरो पटरी पर आनबाक प्रयासक तहत कहलयनि, ओ, मटरू कमति, एगो फिलीम देखने रही ताहि में त विचित्रे हिन्दीक प्रयोग देखलयैक। जेना ‘अपुन बोले तो, पता नही फिलीम बला सब केहन हिन्दीक प्रयोग षुरू कयलक अछि। ताहि पर ओ सब कहत जे बिहारी कें षुद्व हिन्दी बाजहि ने अबैत दैक। खैनी के ठोर तार दैत मटरू कामति बिहारी बाजे तो-बोका, बक्लेल बुद्वि-हारी कहि फेर चुप्प भऽ गेलाह।
आब हमरा नही रहल गेल। खौंजाकऽ निकलल रही कि? जखन सँ भेटलाह अछि लगातार बमक गोले छोड़ि रहल छी। की बात छैद्य जखन अहाँ सन मिथिला प्रेमी आ बिहारी होयबा पर गार्व करनिहार आदमी एहन एहन बात करत तऽ बाहरी लोक किएक ने हमरा सबके तऽ की हम जे किछु बजैत छी से अहाँ मने बड्ड प्रसन्न भऽ कऽ बाजि रहल टीद्य अपन अनुभव सऽ आहट भऽ क हमरा एना बाजय पड़ि रहल अथ्छ, मटरू कामति अचनाक बचाव के मुद्रा मे आबि गेल छलाह। बिहारी कें दुनियाक कोनो कोन मे की एकजुट कयल वा देखल जा सकैत अछि ताहु आर बेसी असंभव बात मानल जाय। कहबाक लेल फलाना महानगर मे एतेक लाख बिहरी वा मैथिल रहैत छथि तऽ फलाॅ नगर मे एतेक लाख। दर्जनो संस्था-संगठन नाच-गान क एगो कार्यक्रम साल मे करता, ने करता संस्था टूट- विखंडन के षिकार भऽ जायता अपना मे सब महा पुरूशर्थी बनल रहता। लेकिन बाहरी खासकऽ स्थानीय नागरीक क सामने बिलाय भऽ जयता। जौं कियो एक गोटे हिम्मत कऽ कोनो स्ािानीय कें उछंडताक जवाब ओकरे भाशा में गारि वा मारि स देत तऽ सबसे पहिने अपने समाज ओकर खिदांस करत, समर्थन के बाते छोड़ू, स्ािानीय लोकक डर स अपने आदमी से मुँह फेर लेगा, जेना ओकरा बिहारी का मैथिल समाज से मतलबे नहि है। तै देखते हैं लाखो-लाख बिहारी जिस महानगरों में रहता है ओतऽ एगो पार्शदो अपना बलबूता पर अपने समाज का जीतवा पता है। एक बोतल षराब पर बोट बेचनेवाला बिहारी के स्वाथिमान का रक्षा क्या घंटा कर पाएगा। धीरे-धीरे मटरू कामति फेरो आवेषित होबय लगलाह। दोसरक चाकरी आ अपनअपन लोक का टांग खींचबा मे आत्म विमुग्घिन एहन प्रजाति ब्रहमाण्ड मे कतहु नहि भेटेगा। जे समर्थ है आर्थिक वा प्रषासनिक अधिकार से ओ तो मात्र अपन स्वार्थेटा लेल मैथिल वा बिहारी पहचान खोलता है। ओना ओ बिहारी षब्दे से नाता तोड़ि लेता है। बीचबीचैवा अपन स्वार्थ आ महत्वाकांक्षा के तहन संस्था-संगठन का कारोबार करेगा अपना मे ककुर कटाउझ करेगा आवष्कतानुसार माह भंग का टाटक करेगा आ अगिला स्वार्थ जागने तक स्व निर्बासन मे चला जाएगा। बाँकी बचेगा आर्थिक रूप निम्न वर्गीय समुदाय जे रिक्सा-रेहड़ी चाह-पानक इंतजाम मे लगा रहता है और ओकरे सबको लोग बिहारी का प्रतिनिधि वा हैसियत-औकात के रूप मे देखता है आ बिहारी को हेय दृस्टि से देखसता है। अपना मे बिहारी भाशा, क्षे? आ जाति के नाम भले ही कपर फोड़ी करता रहे बाहरी के नजरि मे तऽ सब सबके होता है नऽ दिल्ली, मुम्बई, कोलकता कत्तौ बिहारी को मनुक्खक लेखा मे गिनती होता है। आसाम, कष्मीर, पंजाब मे बिहारी मारा जाता है। लोक बुझता है ई सबसे निरापद, निस्सहाय जीव है छकरो एकरा जतेक छकैर सकते हो तै तौ कहता हुँ बिहारी बाजे तो बोका बकलेल, बुद्धि-हारी, बक्टटे बूडिबक आ जतेक भी उपमा आप दे सकते है दे दिजीए गदहा जकाँ ई समाज सब कलुक आ कु-विषेश्णका भार बिना प्रतिरोघ का स्वीकार करता रहेगा। जौं ऐना नही हासेता बेवकूफ बिहारी भैया को महाराश्ट्र से भगाने की बात करनेवाले केा मँुहतोडद्य जबाब देता, कलकता आ दिल्ली का गंदगी कहनेवाले का मुँह नोच लेता किन्तु मुँह से पहलमानी करनेवाले को कभी अखाड़ा पर उतरते देखे हैं, जे बिहारी उतरेगा। नहि तो अपने संख्या-बल और सामूहिक हैयित के बल पर सभी महानगर मे ई समुदाय महा-षक्ति रहता लेकिन असल मे कीद्य कत्तौ गिनत्तीयो होता है सकरा सबके। तैं कहता हुँ जखन बिहारी का र्दद कचोटने लगे तो रामवाण की तरह याद करि लीजिएगा !

2 टिप्‍पणियां:

‘नज़र’ ने कहा…

बहुत बढ़िया!

maithilmithila ने कहा…

विपनजी अहांक ब्लॉग अति सराहनीय अछि....लेकिन अहि में स्लाइडक संग किछु और गीत बढ़ाउ........अहि में एखन एकेटा गीत अछि.....एकर संख्या बढ़ाउ........ताकि पाठक लोकनि के वेराइटी भेट सकैन्ह.........
अहांक रचना सबहक हम नियमित पाठक छी.....अहिना रुचिगर आ छोट-छोट किस्सा-पिहानी देल करु.....ताकि हमरो सन-सन निमिष मुरुख सबहक इंटरटेंमेंट भ सकै........ओम प्रकाश झा, सीएनईबी, नोएडा